अगर लिखा होगा तो मिलोगी ज़रूर

 


कफ्काको मौनता, बेचैन छोड्छौ।

दरबारमार्गका अत्तर बर्साउँछौ,

आफैँ फिजा फैलाउँछौ।

अहा, अदामा शाहज्यादी जस्तै,

आफू नजिक तान्छौ।

अनि सोध्छौ— भुमरीमा कसरी फस्यौ तिमी?


अगर लिखा होगा तो मिलोगी ज़रूर,

अगर नहीं तो खुदा को बुलाऊँ, तब भी तुम दूर चलोगी।

पूरी कायनात भी अगर मेरे हाथों में आ जाए,

तो भी कोई किस्मत नेपोलियन की तरह पाए।


इस जिस्मोहायात  में तो रह गया—

आपको क़रीब से महसूस करना भी।

अगर दूसरी जिस्म खुदा दे,

तो बनाए आपकी प्रेमी बचपन से ही।


और खुदा आपको ऐसा बनाए

कि आपको बनाने वाले ही आपसे प्रेम करें,

पर लोग आपको नापसंद न करें।

और किसी को नहीं,

आप सिर्फ मुझे ही मिलें।

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